अब हर धर्म में ऐसे लोग होते हैं जो अपने आप की चौकीदारी कम, दुसरे की चौकीदारी में बड़ी दिलचस्पी लेते हैं|
“असली स्वराज कुछ लोगों द्वारा सत्ता अधिग्रहण कर लेने पर नहीं आयेगा, बल्कि यह तब आयेगा, जब सारी जनता में इतनी ताकत आ जाये कि जब भी कोई सत्ता का दुरुपयोग करे, तो उसका विरोध कर सकें.”
"Jinhe Sapne Dekhna Accha Lagta Hai, Unko Raat Choti LaGti Hai'' Aur, Jinko Sapne Pure karna Achha LaGta Hai, Unko Din Chota LaGta Hai."
Tuesday, February 28, 2012
साहित्य और राष्ट्र ! (वीर सावरकर)
साहित्य केवल अर्थशास्त्र का या कामशास्त्र का प्रपंच नहीं। साहित्य तो राष्ट्र की बुद्धि का सामर्थ्य का शौर्य का प्रतीक है। जिस राष्ट्र की बढ़त समाप्त हो चूकी हो जो दुर्बल हो उसके साहित्यकार भी बढ़त शून्य बौने और दुर्बल ही होंगे। - वीर सावरकर
हमारा देश उसका निकट उदहारण है.. कभी हिंदी का दरबार लगा करता था!
हमारा देश उसका निकट उदहारण है.. कभी हिंदी का दरबार लगा करता था!
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